चना बूट/#चना होरा
जानकारी..
स्वाद अपना अपना....
हरे चने को दरदरा पीस कर निमोना या निगोना सब्जी बनता है। कुछ लोग बड़ी डालते हैं, तो कुछ आलू और टमाटर। अदरक, लहसुन और लाल मिर्च के तड़के से बनती है शानदार चना भाजी। चना भाजी से संबंधित एक गीत भी है, तै अलहर भइगे भाटों चना भाजी सुकसा अलहर भईगे। हमारे क्षेत्र में चना बूट को चना गादा कहा जाता है। वहां पर भी हरे चने की सब्जी और इसके पत्तों की भाजी बनाने का प्रचलन है। कभी-कभी इसे बथुआ भाजी या पालक भाजी के साथ मिलाकर बनाते हैंं। कई जगहों पर इसके हरे पत्तों की चटनी भी बनती है। हरे चने में मावा मिलाकर या बिना मावा के हलवा और बरफी बनाने का प्रचलन उत्तर भारत में है। इसे बनाने में मूंग के हलवे से भी अधिक मेहनत और समय लगती है। राजस्थान में हरे चने से बना लीलवा और छोड़ प्रचलन में है। इसकी कढ़ी जैसी छाछ वाली सब्जी बनाई जाती है। कचोरी भी बनती है। हरे चने से बनी यहां लीलवा की मिठाई भी प्रसिद्ध है। चने की तासीर गरम मानी गयी है।
विश्व में सबसे ज्यादा चना उत्पादन करने वाला देश भारत ही है। जिनको सामान्यत: लगता है कि चना तो हमारे राज्य की ही फसल है, उन्हें जानकर आश्चर्य होगा कि इसकी खेती रूस, मिस्र, ईरान और रूमानिया देशों में भी की जाती है। चने के पौधे को बॉयोलाजी पढ़ने के दौरान विद्यार्थी पहली बार साइंस की नजरों से देखते हैं। आप भी ध्यान से देखेगें तो दिखेगा कि चने के पौधे के जड़ में गांठे होती हैं। इसे राइजोबियम कहते हैं। यह राइजोबियम बैक्टीरिया वायुमंडल से नाइट्रोजन को लेकर जड़ों की गांठों में एकत्र कर लेता है। इससे मृृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। बदल-बदल कर फसल लेना फसल चक्रण कहलाता है। इसलिध धान की फसल के बाद चने की फसल लेने की सलाह कृषि वैज्ञानिक देते हैं। शरीर के खून को साफ करने में चने सहायता करता है। इसमें प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है।
और छत्तीसगढ़ में होरा संबंधित मुहावरा भी हैं
छाती म होरा भूंजना - किसी को प्रताड़ित करना
छानही म होरा भूंजना - बहुत अत्याचार करना
चना बूट और होरा की
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