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चना बूट/#चना होरा

जानकारी..  आजकल बाजार में पौधे सहित हरा चना की बहार है। मध्यप्रदेश के मैदानी अंचल में इसे चना बूट कहा जाता है। सामान्यत: यह आकार के हिसाब से दो प्रकार का होता है। एक छोटा दाना और दूसरा बड़े दाना। बड़े दाने वाले चना बूट को घोड़ा चना कहा जाता है। जाते हुए ठंड के मौसम में जब खेतों में चने के दाने अब-तब पककर ठोस होने को होते हैं, इसे जड़ सहित उखाड़ लिया जाता है। इसे पानी में धोकर पौधे सहित बेचा जाता है। अगर आप इसे सीधे ही बिना धोए खेतों से तोड़कर खाएंगे, तो दांतो से इसे छिलने के दौरान खट्टापन का आभास होगा। चना के दो-चार पौधों को पैरा से बांधकर एक जूरी बनाकर बाजार में बेचा जाता था। आजकल यह शहरों में किलो हिसाब से मिलने लगा है। ग्राहक चना बूट लेने के पहले अलटा-पलटा कर जरूर देखता है कि इसमें दाने ठीक-ठाक हैं कि नहीं। फिर इसे हल्के धूप में बैठकर दांतो से छील-छीलकर मजे के साथ खाया जाता है। चना बूट का मौसम जब जाने वाला हो, तो लोग इसे अधिक मात्रा में लेकर घर की छत पर या छानही पर सूखा देते हैं। सूखने के बाद इसी में आग लगाकर इसे भून लिया जाता है। सूप से फटककर चना दाना को अलग कर लेते हैं। इसे अंच...

मकर संक्रांति त्योहार

 मकर संक्रांति भारतीय हिन्दू कैलेंडर में महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, जो सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करने को संक्रांति कहा जाता है। इस दिन बड़े पर्व के रूप में मनाया जाता है और विभिन्न भागों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है, जैसे मकर संक्रांति, पोंगल, लोहड़ी, मघुसंक्रांति आदि। इस दिन का महत्व विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग हो सकता है, लेकिन सामान्यत: इसे उत्तरायण की शुरुआत के रूप में देखा जाता है, जिसके साथ सूर्य की ऊँचाई बढ़ने लगती है। इस दिन भारतवर्षभर में बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं, जिनमें सूर्य पूजा, स्नान, दान-पुण्य के कार्यों का महत्वपूर्ण स्थान होता है। मकर संक्रांति हिन्दी पंचांग के अनुसार मकर राशि में सूर्य का प्रवेश होने को संक्रांति कहा जाता है। यह हिन्दी कैलेंडर में जनवरी-फरवरी महीने में मनाया जाता है और इसे भारत भर में विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। इसे पुण्यकाल में मनाने का माना जाता है, और लोग इसे विभिन्न परंपरागत रीतियों से धूप, तिल, गुड़, खीर, और खासकर सेसमी बारीस के साथ मनाते हैं। तिल और गुड़ का महत्व, मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का सा...

पितर पक्ष का महत्व

 पितर पक्ष एक हिन्दू धर्मिक पर्व है जो अक्टूबर महीने के कुछ दिनों तक मनाया जाता है, जब पितृ यानि पूर्वजों की आत्माओं की श्राद्धा अनुष्ठान किया जाता है। यह पर्व पितृ पक्ष के दौरान अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने और उनके आत्मा को शांति देने का उद्देश्य रखता है। पितर पक्ष के दौरान लोग अपने पूर्वजों के लिए पिंड दान, तर्पण, और दान करते हैं। इसके साथ ही, वे श्राद्ध करते हैं जिसमें वे अपने पितृगणों को प्राणाहुति और भोजन का आह्वान करते हैं। इस पर्व का महत्व है क्योंकि यह माना जाता है कि पूर्वजों की आत्माएं इस समय पृथ्वी पर विचरण करती हैं और उनके आशीर्वाद का मिलता है।

योग के महत्व पूण तत्व

  योग एक प्राचीन भारतीय ध्यान और शारीरिक अभ्यास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य शांति, शारीरिक स्वास्थ्य, और मानसिक शांति को बढ़ावा देना है। योग का प्रामुख तत्व आसन, प्राणायाम, ध्यान और धारणा होते हैं। 1. आसन: योग में आसन शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए किए जाते हैं। ये विभिन्न पोजिशन्स होती हैं जिनका प्राकृतिक तरीके से प्राणायाम के साथ किया जाता है। 2. प्राणायाम: यह श्वास की नियंत्रण की तकनीक होती है जिसमें श्वास को नियमित और गहरी तरीके से लिया जाता है। इससे प्राणिक शक्ति को बढ़ावा मिलता है और मानसिक स्थिरता में सुधार होता है। 3. ध्यान: योग में ध्यान का महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ध्यान करने से मानसिक शांति, स्वयं की जागरूकता और आंतरिक समृद्धि होती है। 4. धारणा: यह मानसिक एकाग्रता की तकनीक होती है, जिसमें मन को एक विशिष्ट विषय पर केंद्रित किया जाता है। योग का प्रैक्टिस करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है और आत्मा की ऊंचाइयों की ओर अग्रसर होने में मदद मिलती है। योग कई प्रकार का होता है, जैसे कि हठ योग, भक्ति योग, कर्म योग, और ज्ञान योग, जिनमें ...

#योग_-_-_-_- सिर्फ आधा घण्टा करें योग और रखें कया को निरोग

 आज के समय इंसान का  जीवन बहुत ही भाग दौड़ में समाहित हो गया है,वह काम काज में इतना व्यस्त हो हो चुका है कि वह खुद को समय नही दे पा रहा हैं,और इसी वजह से आज के दौर मे वह धीरे धीरे अपने शरीर को खोता जा रहा है,की आय दिन वह नये नये रोग में ग्रसित होता जा रहा हैं। जैसे उदहारण तौर में लेलें --बल्ड प्रेशर, शुगर, पाईल्स, लकवा,कमर दर्द, जोड़ो का दर्द,गठियावात और अब एक नया रोग लोगों के बीच अपना घर बना रहा हैं रोग का नाम हैं(लाल दाद) यह रोग बहुत ही तेजी से लोगों के बीच फैल रहा हैं। इंसान यदि इस भागमभाग से भरी जिंदगी में यदि खुद के लिए आधा घंटा निकल के थोड़ा योग कर ले तो अपने जीवन में बहुत सुधार किया जा सकता है सुबह जल्दी उठ के अपनी दैनिक दिनचर्या se निबरत हो कर के। सबसे पहले  माध्यम गति की दौड़ कर के शरीर को ऊर्जा वान करके ही योग  की शुरुआत शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता हैं, और एक खास बात जब हम सोये हुये होते है तो हमारी सभी नस सुकड़ जाती हैं इसी कारण हमारा शरीर सुबह उठते समय सुस्त रहता हैं तो आप  बिस्तर से उठने के पहले अपने आप को अंगड़ाई ले लेना चाहिए।ताकि हमारी की सुकड़न ख़त्म ...